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Friday, February 22, 2013

 अफसर

डंडा उठा अब मे अफसर हुआ चलता हु
बगल में फाइल दबा अब पूरा दफ्तर लिए चलता हु
अब हाथ मे पान और मुह मे गाली है,
और कुर्ते धारियों का सबसे चहेता ,ये अफसर मवाली है।

अब तो आलम ये है की रिश्वत ना मिले 
तो उसके घर से तेल का कनस्तर लिए चलता हु,
मतलब कुल मिलकर अब दादागिरी छायी है
और यकीन मानो नौकरी पर हमारी रोनक फिर से लोट आई है.





Monday, February 18, 2013

बात आई , गयी और हो गयी ,
आज हंसी घर आई  ,और रो गयी ,
मेने पीठ थपथपाई हंसी की फिर से ,
कहा आज ज़िन्दगी आई ,हंसी और सो गयी




Wednesday, February 13, 2013

खादी के वेष मे , बंदूके हैं देश मे
वो देश काटने वाले मस्त  हैं घरो मे
वो इन्कलाब गाने वाले ,बंद हैं परदेश मे


Tuesday, February 12, 2013

वो  रोज़ गिरे सडको पर ,उनको उठाने के लिए ,
जब चोराहे पर मिले वो सड़क के ...तो उन्होने उन्हे गिरा हुआ समझ लिया